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Ram Charit Manas - Monday

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परम धर्म 

(सोमवार)

दो. -  गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन ।
     बिनु हरि कृपा न होर्इ सो गावहिं बेद पुरान ।।

धरमु न दूसर सत्य समाना । आगम निगम पुरान बखाना ।।
परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा । पर निंदा सम अघ न गरीसा ।।
पर हित सरिस धर्म नहिं भार्इ । पर पीड़ा सम नहिं अधमार्इ ।।
परहित बस जिन्ह के मन माहीं । जिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं ।।
साधु चरित सुभ चरित कपासू । निरस बिसद गुनमय फल जासू ।।
जो सहि दुख परछिद्र दुरावा । बंदनीय जेहिं जग जस पावा ।।
अघ कि पिसुनता सम कछु आना । धर्म कि दया सरिस हरिजाना ।।
निर्मल मन जन सो मोहि पावा । मोहि कपट छल छिद्र न भावा ।।

दो.- उमा जे राम चरन रत बिगत काम मद क्रोध ।
    निज प्रभुमय देखहिं जगत केहि सन करहिं बिरोध ।।