संत-लक्षण
(बुधवार)दो.- सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम
ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम ।।
अमितबोध अनीह मितभोगी । सत्यसार कबि कोबिद जोगी ।।
सावधान मानद मदहीना । धीर धर्म गति परम प्रबीना ।।
निज गुन श्रवन सुनत सकुचाहीं । पर गुन सुनत अधिक हरषाहीं ।।
सम सीतल नहिं त्यागहिं नीती । सरल सुभाउ सबहि सन प्रीती ।।
जप तप ब्रत दम संजम नेमा । गुरु गोबिंद बिप्र पद प्रेमा ।।
श्रद्धा छमा मैयत्री दाया । मुदिता मम पद प्रीति अमाया ।।
बिरति विबेक बिनय बिग्याना । बोध जथारथ बेद पुराना ।।
दंभ मान मद करहिं न काऊ । भूलि न देहिं कुमारग पाऊ ।।
दो.- निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज ।
ते सज्जन मम प्रानप्रिय गुन मंदिर सुख पुंज ।।

